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मौलिक अधिकार Fundamental Rights



मौलिक अधिकार


वह अधिकार है जो किसी व्यक्ति के जीवन स्वतंत्रता एवं अभिवृद्धि के लिए आवश्यक हैं और जिन्हें राज्य के विरुद्ध न्यायपालिका का संरक्षण प्राप्त होता है मौलिक अधिकार कहलाते हैं


➧ मौलिक अधिकारों की पृष्ठभूमि 1215 ईस्वी में  England के मैग्ना कार्टा से तैयार हुई

➧  फ्रांस की क्रांति ने विश्व को स्वतंत्रता समानता एवं  भाईचारे का संदेश दिया

➧ सर्वप्रथम 1789 इसवी में फ्रांस के संविधान में मानवीय अधिकारों को शामिल किया गया


 भारत में मौलिक अधिकारों की मांग


➯ भारत में मौलिक अधिकारों की घोषणा सर्वप्रथम 1895 में की गई

➯ 1917 और 1919 इसवी के दौरान कांग्रेश द्वारा संकल्प पारित कर मौलिक अधिकारों की मांग की गई और         कांग्रेस के मद्रास अधिवेशन और कराची अधिवेशन में इस मांग को दोहराया गया

   भारतीय संविधान के भाग 3 अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों का उल्लेख है प्रारंभ में भारतीय संविधान में मूल  7 मूलअधिकार थे जो वर्तमान में 6 हैं

    NOTE  ➤    44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से बाहर कर दिया गया है

  मौलिक अधिकारों का वर्गीकरण

➭       समानता का अधिकार अनुच्छेद 14 से 18

➭       स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 19 से 22

➭       शोषण के विरुद्ध अधिकार अनुच्छेद 23 से 24

➭       धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 25 से 28

➭      अल्पसंख्यकों के विशेषाधिकार अनुच्छेद  29 से  37 

➭      संवैधानिक उपचारों का अधिकार अनुच्छेद 32        
    
➭      संसद और मौलिक अधिकार अनुच्छेद 33 एवं 35

⇓⇓   महत्वपूर्ण  ⇓⇓

आपात उपबंध और मौलिक अधिकार

अनुच्छेद 352 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा आपात की घोषणा के साथ-साथ अनुच्छेद 19 का निलंबन हो जाता है अर्थात अनुच्छेद 19 के अंतर्गत दिए गए अधिकारों के हनन पर सुप्रीम कोर्ट में रिट नहीं जारी की जा सकती है

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