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भारत विनिर्माण-आजादी के बाद भारत की चुनौतियां-भारत का विभाजन | gs guru | Indian History|


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|GS GURU| मेरी इच्छा होती है कि काश मुझे टाइम मशीन मिल जाए और मैं अतीत में जाकर भारत की आजादी के जश्न में शामिल हो सकूं, एक भारतीय नागरिक होने के नाते ऐसे जिज्ञासा आप सभी के मन में आना भी स्वाभाविक है। जब हम गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गर्व से अपने देश के सुर वीरों को नमन कर रहे होते हैं तब तन मन उनकी परिस्थितियों की कल्पना में खो जाता है जिन परिस्थितियों में सभी महात्माओं ने देश को आजाद कराया । देश के लिए उन वीरों का बलिदान अमिट है । आज हम चर्चा करेंगे आजादी के बाद उत्पन्न हुई चुनौतियों का और उनके समाधान से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों का । कुछ इस प्रकार के प्रश्न अक्सर हमारे दिमाग में चलते रहते हैं जैसे कि

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आजादी के तुरंत बाद भारत की चुनौतियां


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  • हमें ब्रिटिश हुकूमत से तो आजादी मिल गई थी परंतु भारत का बंटवारा भी हुआ जिससे अत्यंत भयावह स्थिति उत्पन्न हुई ।
  • अंग्रेजों ने देसी रियासतों को स्वेच्छा से किसी भी देश में विलय करने या स्वतंत्र रहने का अधिकार दिया जो भारत की एकता के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी।
  • भारत में अनेक प्रकार की भाषाओं का चलन था अलग-अलग क्षेत्रों की अलग-अलग भाषाएं थी ऐसे में देश के अंदरूनी सीमाओं का निर्धारण करना एक जटिल समस्या थी।
  • तत्कालिक चुनौतियां भी थी कि एकता के सूत्र में बंधे एक ऐसे भारत का निर्माण करता जिसमें भारतीय समाज में व्याप्त सारी विविधताओं के लिए स्थान हूं क्योंकि भारत प्राचीन काल से अपने आकार और विविधताओं के कारण किसी महादेश के समान था।


हिंदुस्तान जिन परिस्थितियों में आजाद हुआ उस वक्त का कोई भी मुल्क वैसे हालात में नहीं आजाद हुआ था। आजाद भारत को विषम परिस्थितियों में स्वयं को स्थापित कर भारत के चौमुखी विकास और संपन्नता का लक्ष्य निर्धारण करना पड़ा । देश के विभाजन के साथ लोगों के मन में व्याप्त आशंकाओं ने भारत के भविष्य के प्रति आशंकाओं ने एक बार फिर भारतीयों को असहाय परिस्थितियों में ढकेल दिया था। चलिए हम बात करते हैं सर्वप्रथम, भारत के विभाजन की,क्यों हुआ था भारत का विभाजन, आखिर क्या थी भारत के विभाजन की वजह, आशा करता हूं आगे  ऐसे तमाम प्रश्नों के उत्तर आपको मिलेंगे।

भारत का विभाजन


सन 1947 का विभाजन पूर्णता धर्म आधारित विभाजन था जो कि मुस्लिम लीग  द्वारा प्रस्तावित  द्विराष्ट्र सिद्धांत का परिणाम था। इस सिद्धांत के अनुसार भारत किसी एक कौम का देश नहीं बल्कि हिंदू और मुस्लिम दो  कौमो का देश था। इसी वजह से मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र पाकिस्तान की मांग की। कांग्रेश ने द्विराष्ट्र  सिद्धांत और पाकिस्तान की मांग का विरोध किया परंतु 1940 के दशक में आए राजनैतिक बदलाव, मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बीच प्रतिस्पर्धा, एवं ब्रिटिश शासन की अहम भूमिका के फलस्वरूप प्रथक पाकिस्तान राष्ट्र की मांग को स्वीकार कर लिया गया।

भारत-पाकिस्तान बंटवारे की प्रक्रिया


भारत और पाकिस्तान का विभाजन इतना सहज था नहीं जितना शब्दों में बयां होता है क्योंकि यह धर्म आधारित विभाजन था ऐसे में कोई भी फैसला करना और उसे अमल में लाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था


विभाजन का आधार धार्मिक बहुसंख्यक भूभाग बना मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र पाकिस्तान एवं शेष भूभाग भारत कहलायेगा ऐसा निश्चित हुआ या निर्णय सामान्यता आसान दिखता है परंतु ब्रिटिश भारत में कोई भी ऐसा इलाका नहीं था जहां मुस्लिम बहुसंख्यक हो मात्र दो ही क्षेत्र थे जहां मुस्लिम आबादी बहुल थी एक पश्चिम में तो दूसरा पूर्व में तब या निश्चित हुआ कि पाकिस्तान में दो इलाके शामिल होंगे पहला पश्चिमी पाकिस्तान एवं दूसरा पूर्वी पाकिस्तान और इनके बीच विस्तृत भारतीय भूभाग होगा ब्रिटिश इंडिया के मुस्लिम बहुल प्रांत पंजाब और बंगाल में अनेक क्षेत्र गैर मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी के थे ऐसे में निश्चित हुआ कि इन प्रांतों में भी धार्मिक बहुसंख्यक के आधार पर ही बटवारा हुआ जिसमें जिलों को मानक के तौर पर रखा गया पंजाब और बंगाल का बंटवारा विभाजन की सबसे बड़ी त्रासदी थे

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14 व्  15 अगस्त 1947 की मध्य रत्रि को भारत आजाद हुआ स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस  रात को संविधान सभा के विशेष सत्र को संबोधित किया था जिसे भाग्य वधू से चिर प्रतीक्षित भेंट या ट्रिस्ट विद डेस्टिनी के नाम से जाना जाता है।

14 15 अगस्त की मध्य रात तक बंटवारे के फैसले में सीमा निर्धारण पर सम्मति ना बन पाने के कारण,आजादी के दिन तक अनेक लोगों को यह नहीं पता था कि वह भारत में है या पाकिस्तान में।

भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा का निर्धारण लंदन के वकील सर सिरिल रेडक्लिफ द्वारा किया गया था

जिसे पूर्वी बंगाल कहा जाता था वहीं आज का बांग्लादेश है और शेष बंगाल,पश्चिम बंगाल के नाम से जाना जाता है। जो भारत का हिस्सा है।

विभाजन के पश्चात संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान ने नए सदस्य के रूप में प्रवेश किया जबकि भारत ने ब्रिटिश भारत की कुर्सी संभाली।।


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