The Way Of Success

GS Guru Breaking News

राष्ट्रीय प्रतीक एवं राष्ट्रीय ध्वज | INDIAN GK | GSGURU | STUDY MATERIAL |

हेलो दोस्तों आप सभी को मेरा नमस्कार आज हम निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा करने वाले हैं जो इस प्रकार है
  1. Rastriya Prateek Kya Hai, Rastriya dhwaj,
  2.  Rastriya Dhwaj ka Upyog Kaha Par Karna Chahiye,
  3. Rastriya Dhwaj Kab Apnaya Gaya,
  4. Rastriya Dhwaj Ka Anupat,
  5. Rastriya Dhwaj Sanhita 2002,
  6. Rastriya Dhwaj Ki Lambai Chaudai,
  7. Rastriya Dhwaj Ke Niyam,
  8. Rastriya Dhwaj Me Kitne Rang Hai,
  9. Rastriya Dhwaj sampurn jankari in hindi,
  10. Rastriya Dhwaj Fahrane ke Niyam,

राष्ट्रीय प्रतीक


प्रत्येक देश के अपने अलग-अलग राष्ट्रीय प्रतीक होते हैं और सभी देशों के नागरिकों का कर्तव्य है कि वह अपने राष्ट्र के प्रति को का सम्मान करें हमारे देश भारत के राष्ट्रीय प्रतीक  निम्नवत है

राष्ट्रीय ध्वज - तिरंगा      |    राष्ट्रीय जल पक्षी - हंस
राष्ट्रीय पक्षी - मोर          |    राष्ट्रीय पहाड - हिमालय                             

 राष्ट्रगीत  -  वंदे मातरम     |       राष्ट्र ग्रंथ -   गीता
 राष्ट्रगान -  जन गण मन    |      राष्ट्रीय फल - आम
 राष्ट्रीय पशु- बाघ।            |       राष्ट्रीय खेल- हॉकी
 राष्ट्रीय नदी - गंगा        |      राष्ट्रपिता  - महात्मा गांधी   राष्ट्रीय लिपि - देवनागरी    |     राष्ट्रीय वृक्ष -अशोक     
 राष्ट्रभाषा  -  हिंदी      |    राष्ट्रीय संवत्सर- विक्रमी संवत
 राष्ट्रीय मंत्र -   ओम     |     राष्ट्रीय पुष्प  - कमल
                 राष्ट्रीय वाक्य  - सत्यमेव जयते 
                   राष्ट्रीय चिन्ह - अशोक स्तंभ 
 राष्ट्रीय पंचांग -  शक संवत   |  राष्ट्रीय मुद्रा - रुपया                        राष्ट्रीय योजना - पंचवर्षीय योजना

ऊपर दिए हुए प्रत्येक वस्तु मात्र ना होकर हमारे देश भारत के गौरव के प्रतीक हैं एवं इनको वैधानिक दर्जा प्राप्त है

अब हम चर्चा करेंगे हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के बारे में 

एवं

हमारे राष्ट्रीय ध्वज से संबंधित 5 ऐतिहासिक तथ्य


1-राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का डिजाइन पिंगली वेंकैया जीने तैयार किया था

2-तत्कालीन ध्वज को भारत के स्वतंत्रता के कुछ दिन पहले ही 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा की बैठक में अपनाया गया था

3-प्रारंभ में राष्ट्रीय ध्वज के डिजाइन में सिर्फ दो ही रंग थे पहला केसरिया हिंदुओं का प्रतीक एवं हरा मुस्लिमों के लिए बाद में अन्य धर्मों के लिए सफेद रंग जोड़ा गया


4-प्रारंभ में राष्ट्रध्वज में चरखे का प्रतीक था जिसके स्थान पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की अनुशंसा पर अशोक चक्र का प्रतीक किया गया था

5-तिरंगा पूर्णता खादी का बनाया गया था यह एक विशेष प्रकार की खादी है जो धारवाड़ के निकट और कर्नाटक के बागलकोट में ही इसकी बुनाई की जाती है जबकि हुबली एकमात्र लाइसेंस प्राप्त संस्थान है जो राष्ट्र ध्वज तिरंगे का उत्पादन व आपूर्ति करता है

राष्ट्रीय ध्वज संहिता


भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में 3 सामान चौड़ाई वाली आयताकार पट्टियां इनके ऊपर केसरिया रंग की पट्टी बीच में श्वेत पट्टी और सबसे नीचे हरे रंग की पट्टी है श्वेत पट्टी में नीले रंग का 24 धारियों से युक्त अशोक चक्र ध्वज  के दोनों और अंकित है ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात क्रमशः तीन अनुपात 2 है अशोक चक्र को सारनाथ के स्तंभ से लिया गया है

कुछ ध्यान रखने योग्य नियम

राष्ट्रीय ध्वज ऐसे स्थान पर फहराना चाहिए जहां सेवा स्पष्ट दिखाई दे,राजकीय भवनों पर अवकाश के दिन सहित प्रतिदिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक ध्वज फहराने का नियम, ध्वज फहराते समय केसरिया रंग की पट्टी हमेशा ऊपर रहनी चाहिए, कटे-फटे और बदरंग ध्वज को कभी भी नहीं फहराना चाहिए, विशिष्ट व्यक्तियों की सलामी के लिए ध्वज को कभी भी झुकाया नहीं जाना चाहिए.

अन्य कोई ध्वज राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा नहीं लगाया जाना चाहिए, ध्वज स्तंभ पर कोई प्रतीक चिन्ह माला पुष्प नहीं लगाने चाहिए, ध्वज का प्रयोग पहनावे में नहीं किया जाना चाहिए, रुमाल में नैपकिन तकिया चादर यूनिफार्म आदि के छापे में राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग नहीं होना चाहिए, जब दूसरे देशों के राष्ट्रध्वजओं के साथ अपने राष्ट्रीय ध्वज को फहराया जाना हो तो हमारा  ध्वज दाहिनी और और सबसे आगे होना चाहिए ,जब राष्ट्रीय ध्वज को लेकर परेड की जाए तब सभी को ध्वज की ओर मुंह करके सावधान की मुद्रा में खड़े रहना चाहिए ,राष्ट्रीय ध्वज को कभी भी जमीन या पानी  से स्पर्श नहीं कराना चाहिए बल्कि हवा में लहराना चाहिए ।

प्रत्येक भारतीयों को ऐसे कृत्य करने से बचना चाहिए जिससे हमारे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान हो। ये हमारा कर्तव्य है।

अति माननीय के निधन पर या राष्ट्रीय शोक के दिनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका या जाता है राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के निधन पर पूरे देश में ध्वज को झुकाया जाता है राजकीय सैनिक अर्धसैनिक बलों के सम्मान में उनकी अर्थी राष्ट्रीय ध्वज से ढकी जाती है परंतु राष्ट्रीय ध्वज शव के साथ जलाया दफनाया नहीं जाता है


सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीएन खरे और न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा की पीठ ने कहा था कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना अनुच्छेद 19 11 के अंतर्गत नागरिकों का मौलिक अधिकार है इसी निर्णय के आधार पर 26 जनवरी 2002 से आम नागरिकों को वर्षभर राष्ट्रीय ध्वज अपने घर पर फहराने की छूट दी गई इस फैसले में राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित करने की भी छूट दी गई





राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति राज्यपाल उपराज्यपाल कैबिनेट मंत्री राज्य मंत्री उप मंत्री उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ही अपनी मोटर कार पर राष्ट्रीय ध्वज लगा सकते हैं( संहिता की धारा  IX  के अनुसार)


संप्रतीक और नाम अधिनियम 1905 में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को एक संपति का दर्जा दिया गया है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 का एक के अनुसार प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह राष्ट्रध्वज राष्ट्रीय प्रतीक को संविधान और राष्ट्रगान का सम्मान करें राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो सार्वजनिक स्थान पर या किसी ऐसे स्थान पर जो सार्वजनिक लगता हो भारतीय राष्ट्रीय ध्वज या भारत के संविधान या उसके किसी भाग को जलाता है विकृत करता है विरूपित् करता है कुशलता है या अपमानित करता है (लिखित या मौखिक शब्दों में कृत्यो द्वारा)तो उसे 3 वर्ष तक के कारावास या जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है

Source; (सभी के लिए कानून) - दीपक कुमार महर्षि


gsguru, guruji, gsguruji, gsguruonline, guruji online, gs guru,

No comments