The Way Of Success

GS Guru Breaking News

मौलिक कर्तव्य

"अनजानी राहों पर तो वीर ही आगे बढ़ा करते हैं, परिचित राहों पर तो कायर ही तलवारे चमकाते हैं"
                                                                                                               
                                                                                                                  नेपोलियन बोनापार्ट

मौलिक कर्तव्य,maulik kartavya in hindi
मौलिक कर्तव्य - GsGuru

GsGuru, GsGuruOnline, आपको  परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध करा रहा है ऐसे में आपका भी यह दायित्व बनता है आप भी जानकारी को अपने मित्रों एवं पारिवारिक जनों में शेयर करें जिससे ज्ञान का अधिक से अधिक प्रसार हो सके और Gs Guru, GS Guru Online, का लक्ष्य सही मायने में पूर्ण हो।

आज हम बेहद ही महत्वपूर्ण टॉपिक मौलिक कर्तव्य के विषय में चर्चा करने वाले हैं मौलिक कर्तव्य प्रतियोगी छात्रों को ही नहीं बल्कि इसके बारे में प्रत्येक भारतीय नागरिक को भी जानना चाहिए 
तो जानते हैं मौलिक कर्तव्य के बारे में

मौलिक कर्तव्य


भारत के मूल संविधान में मौलिक कर्तव्यों का कोई उल्लेख नहीं किया गया था,सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंषा पर नागरिकों के मूल कर्तव्य को भारत के संविधान में 42 वें संविधान संशोधन (1976)  द्वारा जोड़ा गया है इन्हें संविधान अभिलेख के भाग 4 A अनुच्छेद 51 A में स्थान दिया गया है
प्रत्येक भारतीय नागरिकों के 10 मूल कर्तव्य निश्चित किए गए थे जो वर्तमान में 11 है  ११वे  मौलिक कर्तव्य को 86वे संविधान शंशोधन जोड़ा गया, जो निम्न प्रकार है

1-भारतीय संविधान का पालन करना तथा संविधान के आदर्शों व संवैधानिक संस्थाओं,राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान का आदर व सम्मान करना

2-राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम को जिन उच्च आदर्शों से प्रेरणा मिली थी उन्हें हृदयंगम तथा उनका अनुसरण करना

3-भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को सदैव बनाए रखना  और उसकी रक्षा करना यह प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है

4-प्रत्येक भारतीय नागरिकों को यह भी चाहिए कि विपत्ति के समय देश की रक्षा करे एवं आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्र की सेवा के लिए तत्पर रहना चाहिए

5-भारत के सभी लोगों में समरसता और समानता तत्व की ऐसी भावना विकसित करना जो धर्म भाषा प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से रहित हो एवं ऐसी प्रथाओं का त्याग करना जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हो, प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है

6-हमारी मिश्रित संस्कृत की गौरवशाली परंपरा के महत्व को समझना और उसके संरक्षण के लिए सदैव तत्पर रहना

7-वन  नदी झील और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं उन्नत करना तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखना  हमारा एक मौलिक कर्तव्य हैं

8-वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवतावाद अन्वेषण तथा सुधार की भावना का विकास करना

9- सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना तथा हिंसा का त्याग करना

10- व्यक्तिगत तथा सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का निरंतर प्रयास करना जिसे सतत रूप से बढ़ते हुए उपलब्ध की नई बुलंदियों तक पहुंचा जा सके

11- सभी माता पिता एवं संरक्षक का कर्त्तव्य होगा की वह 06  से  14 वर्ष तक के बालकों को प्राथमिक  शिक्षा उपलब्ध  कराए (  86वे  संशोधन )


यह सभी हमारे 11 मौलिक कर्तव्य जिनका पालन  प्रत्येक भारतीय नागरिकों को करना चाहिए

मौलिक कर्तव्य वैसे तो किसी भी आलोचना और समालोचना से परे हैं यह तो प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है इसका पालन करना परंतु मौलिक कर्तव्यो का कुछ शिक्षा विद राजनीतिज्ञ आलोचनात्मक मूल्यांकन भी करते हैं जो मैं आपसे साझा करता हूं

मौलिक कर्तव्यो का आलोचनात्मक मूल्यांकन

इसमें संदेह नहीं है कि नागरिकों के मूल कर्तव्य को संविधान में समाविष्ट करना एक प्रशंसनीय कार्य है परंतु मूल कर्तव्यों की जो सूची संविधान में जोड़ी गई है उसमें पूर्णता का अभाव  है कुछ कर्तव्य ऐसे हैं जो अस्पष्ट है तथा वे समान व्यक्ति के समझ में नहीं आते हैं इतना ही नहीं कर्तव्य को संविधान के बाद बाध्यकारी अध्याय में ना जोड़कर वैकल्पिक भाग 4 A में रखना भी इन्हें महत्वहीन बना देता है इन कर्तव्यों की अवहेलना की स्थिति में अभी तक किसी प्रकार के दंड की व्यवस्था नहीं की गई है यद्यपि संसद द्वारा इस संबंध में दंड की व्यवस्था की जा सकती है वास्तव में कर्तव्यों को मूल अधिकारों के साथ ही जोड़ा जाना चाहिए था उपयुक्त आलोचनाएं मौलिक कर्तव्यों के महत्व को कम नहीं करती हैं मौलिक कर्तव्यों का पालन करके देश में एकता अखंडता की स्थापना की जा सकती है और देश की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हो सकती है यह कर्तव्य राष्ट्र की संपत्ति बन सकते हैं तथा किसी भी लोकतंत्र को सफल बनाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं

gsguru, gsguru online


gsguru.online

 

No comments