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Indian National Congress : A Political Party Of India भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (भारत का एक राजनैतिक दल)



                                                    

 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस देश का प्रभावशाली तथा शक्तिशाली राजनीतिक दल है इस दल की स्थापना सन 1885 में एक अंग्रेज अधिकारी ए ओ ह्यूम के प्रयासों से हुई थी कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी थे कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन मुंबई में गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में संपन्न हुआ इस दल ने आरंभ से ही राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व किया और देश को स्वाधीन कराने में सफलता प्राप्त की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कांग्रेस एक राजनीतिक दल बन गया । कांग्रेश अपने उद्देश्यों नीतियों और कार्य पद्धतियों को अपने प्रत्येक वार्षिक अधिवेशन में स्पष्ट करती है।
 1955 ईस्वी में अवॉडी आंदोलन में कांग्रेस ने अपना लक्ष्य  'समाजवादी ढंग का समाज' घोषित किया।
सन 1957 ईस्वी में कांग्रेस ने अपने उक्त संकल्पों को पुनः दोहराया और अपने संविधान की प्रथम धारा में एक समाजवादी सहकारी राज्य की स्थापना का उद्देश्य घोषित किया। 1959 ईस्वी के नागपुर अधिवेशन में कृषि के क्षेत्र में सहकारी खेती का प्रस्ताव पारित किया ।1964 ईस्वी के भुवनेश्वर अधिवेशन में कांग्रेस ने अपने कार्यक्रम को लोकतंत्रात्मक समाजवाद का नाम दिया। पांचवे सामान्य निर्वाचन 1971 ईस्वी के समय कांग्रेस ने अधिक प्रगतिशील समाजवादी नीतियों को अपनाया और गरीबी हटाओ तथा बेरोजगारी दूर करो का नारा दिया साथ ही बैंकों के राष्ट्रीयकरण सहित पृवी पर्स उन्मूलन भूमिहीनों को भूमि,  सारी संपत्ति की सीमा बंदी जैसे  प्रभाव कारी कदम भी उठाए । सन 1969 में राष्ट्रपति के चुनाव के प्रश्न पर कांग्रेस के दो गुट हो गए थे। दोनों ने ही स्वयं के संबंध में असली कांग्रेश होने का दावा किया। इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाला गुट सत्तारूढ़ दल नई कांग्रेश के रूप में मान्य हो गया और मोरारजी देसाई का सिंडिकेट गुट संगठन कांग्रेश बन गया। पांचवे चुनाव में इंदिरा गांधी की सत्तारूढ़ कांग्रेस को लोकसभा में लगभग 350 सीटें मिली जबकि संगठन कांग्रेस को केवल 16 सीटें मिली परिणाम स्वरुप नई कांग्रेस ने ही असली कांग्रेस का स्थान ले लिया किंतु मार्च 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने लोकसभा में 272 स्थान प्राप्त करके 30 वर्षों से शासन करने वाले कांग्रेसियों से सत्ता छीन ली 2 जनवरी 1978 ईस्वी को कांग्रेस दल पुनः दो गुटों में विभाजित हो गया । एक गुट की अध्यक्षता श्रीमती इंदिरा गांधी बनी और दूसरे दल का नेतृत्व ब्रह्मानंद रेड्डी के हाथ में आया। 1980 के मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस ई 351 सीटें प्राप्त कर पुनः सत्तारूढ़ हुई । अक्टूबर 1984 ईस्वी में श्रीमती गांधी की नृशंस हत्या के बाद श्री राजीव गांधी के हाथों में देश व कांग्रेश की बागडोर आई । दिसंबर 1984 ईस्वी के लोकसभा चुनाव में कांग्रेसी को 400 से अधिक स्थान प्राप्त हुए और उसने स्वतंत्रता के बाद से अब तक के समस्त रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 80% से अधिक सीटें प्राप्त की। नवंबर 1979 में नवी लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। मई 1991 में लोकसभा के लिए संपन्न हुए चुनाव में कांग्रेस को पुनः सर्वाधिक 225 सीटें प्राप्त हुई। कांग्रेस की आंतरिक गुट बंदी के कारण इसकी शक्ति निरंतर छीड हो रही है। 11वीं लोकसभा में कांग्रेस संख्या की दृष्टि से 140 स्थान प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रही। 12 वीं लोकसभा के लिए संपन्न हुए चुनाव में कांग्रेस पुनः दूसरे स्थान पर रही और उसे 140 सीटें प्राप्त हुए। उत्तर प्रदेश में तो कांग्रेस की स्थिति शून्य हो गई । 1999 में कांग्रेस ने अनेक राजनीतिक दलों के सहयोग से भारतीय जनता पार्टी की सरकार को गिराया परंतु लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को अन्य दलों का सहयोग प्राप्त ना होने के कारण सरकार का निर्माण करने में असफलता का मुंह देखना पड़ा।  परिणामस्वरूप देश को पुनः निर्वाचन का बोझ अपने कंधों पर उठाना पड़ा 13 लोकसभा 1999 के निर्वाचन में कांग्रेस को 114 सीटें तथा कुल 28.42% मत प्राप्त हुए । 2004 तथा 2009 में भी कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त हुआ जिसके पश्चात कांग्रेस ने घटक साथी दलों के साथ मिलकर एनडीए 1 तथा एनडीए 2 की सरकार बनाई जिसमें प्रधानमंत्री पद का दायित्व तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी ने अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह को सौंपा। 2014 एवं 2019 के लोकसभा चुनाव में फिर से कांग्रेस को मुंह कि खानी पड़ी एवं देश में बीजेपी कि सरकार बनी
 सदस्यता तथा संगठन
कांग्रेस के संगठन में स्वर प्रथम स्थान इसके सदस्यों को दिया गया है यह सदस्य तीन प्रकार के होते हैं
1- प्राथमिक सदस्य 2- शर्तपूर्ण सदस्य 3-प्रभावपूर्ण सदस्य

संगठन की दृष्टि से आधारभूत इकाई, मोहल्ला या गांव है कोई भी 500 की जनसंख्या का गांव या मोहल्ला कांग्रेस संगठन की आधारभूत इकाई हो सकता है इसके बाद तहसील स्तर पर Congress समितियां होती हैं इनके ऊपर जिला कांग्रेस समितियां होती हैं जो नीचे की समितियों के शीर्ष पर रही हैं प्रत्येक राज्य में एक प्रदेश कांग्रेस समिति भी होती है संपूर्ण देश में ऐसी 25 समितियां हैं संपूर्ण देश के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस समिति है कांग्रेश संगठन की सर्वोच्च संस्था उसकी कार्यकारिणी समिति है इसमें अध्यक्ष कोषाध्यक्ष सचिव तथा अन्य 18 सदस्य होते हैं

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