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1857 की महान क्रांति | कारण | परिणाम | केंद्र | इतिहास | पूर्ण परिभाषा के साथ

अट्ठारह सौ सत्तावन ईसवी की महान क्रांति


1857 ईसवी की क्रांति भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है कुछ विद्वान इसे सैनिक विद्रोह कहते हैं अधिकांश विद्वान ऐसे भारतीयों का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मानते हैं इस क्रांति से जुड़े हुए महत्वपूर्ण एवं प्रमुख बिंदुओं पर आजम चर्चा करेंगे जो इस प्रकार है
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1857 ईसवी की क्रांति के प्रमुख कारण


सैनिक कारण


भेदभाव की नीति- भारतीय सैनिकों को वह सुविधाएं वेतन भत्ते आदि प्राप्त नहीं होते थे जो अंग्रेजों को मिलते थे उच्च सैनिक पदों पर भारतीयों को नियुक्त नहीं किया जाता था

भारतीय सैनिकों के आत्मसम्मान को ठेस-भारतीय सैनिकों के आत्मसम्मान को पद पद पर ठेस पहुंचाई जाती थी परेड के समय अंग्रेज अधिकारी भारतीय सैनिकों को गालियां देते थे।
रियासती सेना की समाप्ति-18 से 56 ईसवी में अवध अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया और उसकी 60,000 से ना तोड़ दी गई जिससे सैनिक बेकार हो गया इस प्रकार ग्वालियर मालवा आदि की सेनाएं भी समाप्त कर दी गई।

राजनीतिक कारण 


डलहौजी के अपहरण नीति
लॉर्ड डलहौजी की साम्राज्यवादी नीति से देसी राज अंग्रेजी राज में मिला लिया तथा उसकी अपहरण की नीति ने संपूर्ण भारत के देसी राज्यों में अशांति उत्पन्न कर दी क्योंकि उसके उसने सातारा जैतपुर संबलपुर बाघट उदयपुर झांसी नागपुर को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया इससे देसी राज्यों में असंतोष  भड़क उठा।

मुगल सम्राट के साथ अनुचित व्यवहार


ब्रिटिश सरकार ने यह आदेश दिया कि बहादुर शाह द्वितीय की मृत्यु के पश्चात उसके उत्तराधिकारी को लाल किले तथा शाही सांसद से वंचित कर दिया जाए

अवध का अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाया जाना

अवध के नवाब वाजिद अली शाह की वफादारी के उपरांत भी उसे सिंहासन से वंचित कर दिया गया और अवध को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया गया इससे मुसलमान तथा अन्य शासक अंग्रेज से नाराज हो गए

पेंशन तथा उपाधियों की समाप्ति


उच्च वर्ग के लोगों को पेंशन तथा उपाधियों से वंचित कर दिया गया पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब को भी पेंशन तथा उपाधि से वंचित कर दिया गया था वह भी अंग्रेजों के विरुद्ध हो गए

धार्मिक कारण


ईसाई धर्म का प्रचार

भारतीयों को इस बात का भय था कि ईसाई धर्म के प्रचार से उनके धर्म नष्ट हो जाएंगे उस समय इसाई पादरी बड़ी तेजी से अपना धर्म प्रचार कर रहे थे अतः जनसाधारण भी अंग्रेजों से नाराज था

जातीय नियमों की उपेक्षा
नई शिक्षा प्रणाली तथा रेल के प्रचलन को भी भारतीयों ने जाति नियम की उपेक्षा समझी सभी जाति के लोगों के साथ बैठना यात्रा करना साथ-साथ पढ़ना धर्म में हस्ताक्षेप समझा गया इससे सामाजिक आक्रोश पनप उठा

चर्बी लगे कारतूस ओं का प्रयोग
सैनिकों को जो कारतूस प्रयोग के लिए दिए गए उन्हें दांतों से काटना पड़ता था अतः यह अफवाह फैल गई कि इन कारतूस में गाय तथा सूअर की चर्बी मिली होती है इससे हिंदू तथा मुसलमान सैनिक भड़क उठे तथा उन्होंने क्रांतिकारियों का साथ दिया

आर्थिक कारण


आधा की क्रांति के फलस्वरूप इंग्लैंड से सस्ता माल तैयार होकर भारत आने लगा था भारतीय कारीगरों का माल महंगा पड़ता था अतः भारतीय उद्योग धंधे ठप होने लगे हैं और बहुत से कार्य कर बेकार हो गए बताया लोग भी अंग्रेजों के विरुद्ध हो गए जो जमीदार समय पर लगा नहीं चुका पाते थे उनकी जमीन भी छीन ली जाती थी बैंक ने लगाम से मुक्त भूमि को लोगों से छीन लिया जिन लोगों की भूमि चीनी गई उन्होंने क्रांतिकारियों का साथ दिया अंग्रेज कर्मचारी सेवानिवृत्त होने पर अपने जीवन भर की कमाई अपने साथ ले जाते थे और वही अपनी पेंशन का उपभोग करते थे इंग्लैंड में बने हुए माल के भारत में बिकने से भी भारत का दान इंग्लैंड जाने लगा इससे भारतीयों में बहुत असंतोष फैल गया था जिससे व्यापारी वर्ग भी क्रांतिकारियों के साथ सम्मिलित हुआ

अट्ठारह सौ सत्तावन ईसवी की क्रांति के परिणाम


1-भारतीय सेना में राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न हुई।
2-ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन भारत से समाप्त हो गया
3-भारतीय नरेशो को दत्तक पुत्र रखने या गोद लेने का अधिकार प्रदान किया गया
4-इस विद्रोह से अंग्रेजों तथा भारतीयों के मध्य की खाई और चौड़ी हो गई
5-भारत पर इंग्लैंड का नियंत्रण कड़ा होता चला गया।
6-भारतीय अपनी कमियां पहचान गए और स्वतंत्रता के महत्व का भान हो गया,।

1857 ईसवी की क्रांति से जुड़े हुए महत्वपूर्ण तथ्य

18 57 के विद्रोह का तात्कालिक कारण चर्बी लगे कारतूसो का प्रयोग था यद्यपि इस विद्रोह के अन्य मुख्य कारण आर्थिक सामाजिक राजनीतिक एवं धार्मिक थे 

29 मार्च अट्ठारह सत्तावन ईसवी को बैरकपुर के 34 वे नेटिव इन्फेंट्री के एक सैनिक मंगल पांडे ने गाय और सुअर की चर्बी मिले कारतूसो को मुंह से काटने से स्पष्ट मना कर दिया था फल स्वरुप उसे गिरफ्तार कर 8 अप्रैल अट्ठारह सत्तावन ईसवी को फांसी दे दी गई 

10 मई 18 57 के लिए मेरठ की पैदल टुकड़ी 20 N.I. ने क्रांति की शुरुआत की

11 मई 18 57 को प्रातः ही दिल्ली पहुंच कर दिल्ली पर अधिकार कर लिया गया।
 दिल्ली में विद्रोहियों को मुगल शासक बहादुर शाह ने बख्त खान के सहयोग से नेतृत्व प्रदान किया।
 तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग था।

 झांसी की पराजय के बाद नेपाल चले गए तात्या टोपे एक जमीदार मित्र के विश्वासघात के कारण पकड़े गए 
जिनको 18 अप्रैल 1859 को फांसी दे दी गई

 झांसी की रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेज जनरल ह्यूरोज से लड़ते हुए  वीरगति को 17 जून 1858 को वीरगति को प्राप्त हुई ।
18 57 की क्रांति के समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री पामस्टर्न था
विद्रोह से पूर्व अजीमुल्लाह,नाना साहब एवं रंगा बापू आदि प्रमुख नेता सतारा राज्य का पक्ष रखने के लिए लंदन गए थे


1857 की क्रांति के स्थानीय विद्रोही नेता


सतारा से रंगा बापूजी गुप्ते, हैदराबाद के सोना जी पंडित रंगा राव पांडे मौलवी सैयद अलाउद्दीन, कर्नाटक के भीमराव मुंदरगी छोटा सिंह, कोल्हापुर के अन्ना जी फडणवीस तात्या मोतित, मद्रास से गुलाम गौस सुल्तान बक्शी गर्ल फुट केयर नगरी कृष्णा कोयंबटूर के मूल बागल स्वामी, केरल के विजय कुदारत कुंजी मामा, मूल्ला सलिकोन जी मल्हार, गोवा में दीपू जी राणा, गोलकुंडा क्षेत्र में चिंता भूपति और उसका भतीजा सन्यासी भूपति तथा असम में दीवान मनीराम थे।

1857 की क्रांति से जुड़े महत्वपूर्ण कथन

जॉन लारेंस ने कहा था कि यदि विद्रोहियों में एक भी योग्य नोट नेता होता तो हम सदा के लिए हार जाते 
वी डी सावरकर ने अपनी पुस्तक में 18 सो 57 के विद्रोह को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहां, आरटी होम्स ने कहा कि यह विद्रोह हिंदू-मुस्लिम संयंत्र का परिणाम था षड्यंत्र आरसी मजूमदार ने कहा कि या ना तो प्रथम ना ही राष्ट्रीय और ना ही स्वतंत्रता संग्राम था डॉक्टर एसएन सेन ने 18 57 के विद्रोह पर अपनी पुस्तक 1857 लिखी

अट्ठारह सौ सत्तावन ईसवी की क्रांति के महत्वपूर्ण केंद्र एवं भारतीय नायक

केंद्र- दिल्ली
 विद्रोह तिथि -11,12 मई 18 57 
भारतीय नायक-बहादुर शाह जफर, बख्त खान,
 विद्रोह दमन तिथि - 21 सितंबर 1857
 British Nayak-निकलसन एवं हडसन

केंद्र - कानपुर 
5 जून 1857 
नेतृत्वकर्ता- नाना साहब,तात्या टोपे (सैन्य नेतृत्व)
 दमन तिथि-6 सितंबर 1857 
ब्रिटिश नायक - कैंपबेल

केंद्र - लखनऊ
 विद्रोह तिथि - 4 जून 1857 
नेतृत्व करता-  बेगम हजरत महल, बिरजिस कादिर,
दमन तिथि- March 1858 
ब्रिटिश नायक-कैंपबेल 

केंद्र-झांसी 
विद्रोह प्रारंभ तिथि - जून 1857 
नेतृत्व -  रानी लक्ष्मीबाई
 विद्रोह दमन तिथि- मार्च 1858
 ब्रिटिश नेतृत्वकर्ता- जरनल ह्यूरोज

केंद्र- इलाहाबाद
 प्रारंभ तिथि - 18 57
 नेतृत्व - लियाकत अली 
दमन तिथि-1858 
ब्रिटिश नेतृत्व -  कर्नल नील 


केंद्र- जगदीशपुर 
प्रारंभ तिथि - 1857,अगस्त 
नेतृत्व - कुंवर सिंह अमर सिंह 
दमन तिथि -
 ब्रिटिश नेतृत्व - विलियम टेलर एवं  विंसेट आयर

केंद्र -बरेली 
प्रारंभ tithi- 1857 से 
भारतीय जन नायक - खान बहादुर खान
 दमन तिथि - 1858 
ब्रिटिश नेतृत्व - कर्नल नील 

 केंद्र- फैजाबाद 
1857 
भारतीय जन नायक - मौलवी अहमदुल्लाह 
दमन तिथि - 1858
 ब्रिटिश नेतृत्व - जनरल रेनार्ड

Kendra- फतेहपुर 
1857
 भारतीय जन नायक-अजीमुल्ला
दमन तिथि-1858
ब्रिटिश नेतृत्व-जनरल रेनर्ड

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